Mahatma Gandhi ke Pita ka Naam Kya Hai ? 2022

महात्मा गांधी के पिता का नाम (Mahatma Gandhi Ke Pita Ka Naam kya hai) :अगर आपको महात्मा गांधी के पिता के बारे में नहीं पता है तो आज हम इस आर्टिकल के जरिए आपको बताएंगे कि महात्मा गांधी के पिता कौन थे।

महात्मा गाँधी के पिता का नाम मोहनदास करमचंद गाँधी है। ये पोरबंदर, राजकोट, और बांकानेर के दीवान अंग्रेजों के शासन के दौरान थे।

धार्मिक प्रवृत्ति के गांधी जी का परिवार था और वैष्णव धर्म को यह मानते थे। 

शांति और अहिंसा के मार्ग पर हमेशा से चलने वाले थे हमारे देश में महात्मा गांधी को शांति और अहिंसा का नायक कहा जाता है।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नायक महात्मा गांधी को कहा जाता है। महात्मा गांधी हमारे देश के सभी देशवासियों के लिए एक प्रेरणा है,और हमेशा रहेंगे।

Mahatma Gandhi ke Pita ka Naam-करमचंद्र गांधी जी का जीवन परिचय –

महात्मा गांधी के पिता करम चंद्र गांधी हैं करमचंद गांधी जी के पिता का नाम उत्तमचंद गांधी था। और माता का नाम लक्ष्मी गांधी था। यह पोरबंदर रियासत में राजस्थानी कोर्ट के सभासद, राजकोट के दीवान थे। कुछ समय तक यह उच्च पद पर प्रतिष्ठित वांकानेर के दीवान भी थे करम चंद्र गांधी जी कबा नाम से भी जाने जाते थे।

दीवान गिरी रियासत की चैन की नौकरी नहीं थी पोरबंदर पश्चिम भारत 300 रियासतों में से एक था जिन पर अंग्रेजों के सहायता और मात्र राज कुल में जन्म लेने वाले राजाओं का ही शासन हुआ करता था मनमानी करने वाले राजा, सर्वोच्च ब्रिटिश सत्ता के निरंकुश पॉलिटिकल एजेंटों और युगो से दबी कुचली प्रजा के बीच निरापद कर्तव्य निर्वाह करने के लिए काफी धैर्य कूटनीतिक कौशल और  व्यावहारिक बुद्धि की जरूरत पड़ती थी।

करम चंद्र गांधी और उनके पिता उत्तमचंद गांधी दोनों कुशल प्रशासन होने के साथ-साथ सच्चे प्रतिष्ठित व्यक्ति भी थे। यह विश्वास और साहस पर अडिग रहने वाले व्यक्ति थे जिनके चलते इन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

उत्तमचंद गांधी के घर को शासन के सेना ने घेर लिया और बारूद बरसाए थे जिसकी वजह से उन्हें रियासत से भागना पड़ा।  अपने सिद्धांतों पर अटल उनके पुत्र करम चंद्र गांधी ने पोरबंदर से हट जाना ही पसंद किया।

महात्मा गांधी जी का जीवन- परिचय –

महात्मा गांधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर शहर में 2 अक्टूबर 1959 में हुआ था।महात्मा गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था इनको पूरा देश बापू नाम से बुलाता है महात्मा गांधी जी हमारे भारत के राष्ट्रपिता कहे जाते हैं। और पिता का नाम करम चंद्र गांधी था इन्हें के नाम पर महात्मा गांधी का नाम मोहन करमचंद गांधी पड़ा था।

 इनकी माता  पुतलीबाई एक धार्मिक महिला थी महात्मा गांधी अपने तीन भाइयों में से सबसे छोटे थे जिसमें दो बड़े भाई और एक बड़ी बहन थी इनकी बहन का नाम रलियत अट गांधी और भाई का नाम लक्ष्मीदास गांधी और कृष्ण दास का गांधी था। इनका विवाह 13 साल की उम्र में कस्तूरबा के साथ हुआ था महात्मा गांधी के चार बेटे थे जिनका नाम हरिलाल, मणिलाल, रामदास और देवदास था।महात्मा गांधी की मृत्यु 30 जनवरी 1948 में नई दिल्ली में हुआ था।

महात्मा गांधी का शुरुआती दौर और शिक्षा –

महात्मा गांधी जी ने कानून की शिक्षा प्राप्त करने के लिए मई 1888 में लंदन गए थे।

और कानून की शिक्षा प्राप्त करके इन्होंने 1893 में दक्षिण अफ्रीका वकील के तौर पर काम करने गए वहां जाकर इन्होंने पहली बार नस्लीय भेदभाव का अनुभव किया। उनके पास टिकट होने के बावजूद ट्रेन के प्रथम श्रेणी के डिब्बे से बाहर धकेल दिया गया क्योंकि वह सिर्फ गोरे लोगों के लिए था।

प्रथम श्रेणी में यात्रा करना भारतीय और अन्य लोगों के लिए प्रतिबंधित था महात्मा गांधी जी पर इस घटना का गहरा प्रभाव पड़ा और उन्होंने नस्लीय भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष ठान लिया। वहां जाकर उन्होंने देखा कि भारतीयों के लिए अफ्रीका में यह घटना आम बात थी। फिर उन्होंने 22 मई 1894 मे भारतीय अधिकारों के लिए अफ्रीका में कठिन परिश्रम करके नाटाल इंडियन कांग्रेस की स्थापना की और बहुत ही कम समय में महात्मा गांधी जी दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय नेता बने।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका –

महात्मा गांधी जी जब 1915 में भारत लौट कर आए और श्री गोपाल कृष्ण गोखले जो कि उनके गुरु थे उनके साथ इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल हो गए। बिहार और गुजरात में चंपारण व खेड़ा के आंदोलन पहली बड़ी उपलब्धि महात्मा गांधी जी की थी।

महात्मा गांधी जी ने असहयोग आंदोलन, भारत छोड़ो, सविनय अवज्ञा आंदोलन, का नेतृत्व भी किया था।

महात्मा गांधी जी का लेखन –

महात्मा गांधी जी एक विपुल लेखक भी थे इन्होंने निम्नलिखित पुस्तकें लिखी हैं जो इस प्रकार है –

  • गुजरात 1909 में हिंदी स्वराज प्रकाशित हुआ।
  • अपनी आत्मकथा महात्मा गांधी जी ने ‘सत्य के प्रयोग’ भी लिखी है।
  • दक्षिण अफ्रीका में उनकी आत्मकथाएं हिंदी स्वराज, सत्याग्रह आदि प्रमुख का है।
  • महात्मा गांधी जी ने गुजराती, हिंदी, इंग्लिश अनेक समाचार पत्रों का संपादन किया था।
  • इंग्लिश और हिंदी में हरिजन, इंग्लिश में यंग इंडिया और गुजराती पत्रिका नवजीवन प्रमुख पत्रिकाएं हैं।

पुरस्कार –

  • टाइम मैगजीन ने 2011 में विश्व के लिए प्रेरणास्रोत रहे श्रेष्ठ 25 राजनीतिक व्यक्तियों में महात्मा गांधी जी को चुना ।
  • महात्मा गांधी जी को कभी नोबेल पुरस्कार तो नहीं मिला लेकिन महात्मा गांधी जी 5 बार 1937 से 1948 तक नामित किए गए थे।
  • प्रतिवर्ष सामाजिक कार्यकर्ताओं, विश्व नागरिक और नेताओं को भारत सरकार गांधी शांति पुरस्कार से नवाजती है।
  • नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष करने वाले नेता को इस पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।

महात्मा गांधी के सिद्धांत –

महात्मा गांधी जी ने अपना पूरा जीवन सत्य पर समर्पित कर दिया था उन्होंने अपनी आत्मकथा का नाम भी सत्य के प्रयोग का नाम दिया था इनकी कई सारी सिद्धांत है सत्य, अहिंसा, सादगी, विश्वास, ब्रम्हचर्य आदि इनके कई सारे सिद्धांत थे जिस के मार्ग पर इन्होंने अपनी पूरी जिंदगी व्यतीत किया। महात्मा गांधी जिस मार्ग पर चलें उस मार्ग पर सबको चलने की सलाह दिया करते थे।

महात्मा गांधी की हत्या –

भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मृत्यु एक हत्या थी जो30 जनवरी 1948 नई दिल्ली में नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारकर महात्मा गांधी जी की हत्या कर दी गई थी।

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