Computer History in Hindi | कम्प्यूटर का इतिहास और आविष्कार कैसे हुआ जाने

आज का हमारा आर्टिकल कम्प्यूटर का इतिहास (Computer History in Hindi) से संबंधित है।

कंप्यूटर हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया है वर्तमान स्थिति में कंप्यूटर हमारे बहुत काम आ रहा है। जब से भारत में कोरोनावायरस आया तब से ही कंपनियों ने संपूर्ण रूप से work-from-home का आदेश अपने कर्मचारियों को दे दिया स्कूल और कॉलेज भी लंबे समय तक के लिए पूरी तरह बंद कर दिए गए थे और बच्चे घर पर ही कंप्यूटर पर ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे थे।

कंप्यूटर मानव की जिंदगी का एक अहम हिस्सा है अब हर सरकारी एवं निजी कार्यालय में कंप्यूटर से कई कार्य संभव किए जाते हैं और कंप्यूटर की मदद से ही दुनिया के किसी भी कोने में बैठे दो इंसान आपस में बात कर सकते हैं और एक छात्र ऑनलाइन आसानी से किसी भी कोर्स को पूरा कर सकता है।

कंप्यूटर मानव की जिंदगी में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है परंतु क्या आपको पता है कि कंप्यूटर का इतिहास क्या (Computer History in Hindi) है? अगर नहीं, तो आज आपको हमारे लेख के माध्यम से कंप्यूटर के इतिहास और कंप्यूटर से संबंधित अन्य जानकारी प्राप्त कर पाएंगे।

ये भी पढ़े – केदारनाथ मंदिर का इतिहास

Computer History in Hindi | कम्प्यूटर का इतिहास

कंप्यूटर के इतिहास की बात की जाए तो कंप्यूटर का इतिहास 2500 साल पुराना है। कंप्यूटर का इतिहास कई काल खंडों में विभाजित है और हम उन्हें काल खंडों की सहायता से कंप्यूटर का इतिहास (Computer History in Hindi) आपको समझाएंगे जो की इस प्रकार है-:

Abacus :-

कंप्यूटर की दुनिया में सबसे पहला डिवाइस अबेकस था। अबेकस का निर्माण गणना के लिए किया गया था और यह 600 ईसा पूर्व में चीन में संभव हुआ था। Abacus डिवाइस की सहायता से गणना करना आसान हो गया था। यह एक आयताकार बक्से जैसी डिवाइस होती है जिसमें तारे लगी होती हैं और इन तारों में मोतियों को फसाया जाता है इन मोतियों को ही गणना के दौरान जोड़ा या घटाया जाता है।

John Napier’s Bone :-

कंप्यूटर की दुनिया में दूसरा यंत्र जॉन नेपियर का मल्टीप्लिकेशन यंत्र था। यह जानवरों की हड्डियों दांतों से बनी छड़ें होती थी जिन पर नंबर लिखे होते थे। यह कार्ड बोर्ड मल्टीप्लिकेशन कैलकुलेटर के नाम से भी जाना जाता है। इस डिवाइस का प्रयोग अंको को गुणा और भाग करने के लिए किया जाता है। जॉन नेपियर एक जाने-माने गणितज्ञ और फिजिशियन थे उनके द्वारा ही कार्डबोर्ड मल्टीप्लिकेशन कैलकुलेटर डिवाइस का निर्माण किया गया था इसलिए इस डिवाइस को जॉन नेपियर बोन के नाम से जाना जाता हैं।

Pascaline :-

कंप्यूटर की दुनिया में तीसरा यंत्र पास्कलाइन था। इस डिवाइस का निर्माण फ्रांस के मशहूर गणितज्ञ ब्लेज पास्कल ने किया था और उन्होंने इस डिवाइस का नाम एडिंग मशीन (adding Machine) दिया था। इस डिवाइस द्वारा अंको को जोड़ने और घटाने की गणना की जा सकती है। यह डिवाइस घड़ी और ओडोमीटर की सहायता से कार्य करती है। यह सर्वप्रथम मैकेनिकल कैलकुलेटिंग मशीन थी।

Reckoning Machine :-

रेक्कनिग गणना करने वाली ऐसी मशीन है जिसकी सहायता से जोड़ना घटाना के साथ गुणा और भाग करना भी संभव है। इस मशीन का निर्माण जर्मन के गणितज्ञ और दार्शनिक बेरन गॉटफ्रेड विलहेल्म वॉन लेबनीज द्वारा किया गया है।

Jacquard Loom :-

जेकार्ड लूम कंप्यूटर की दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण डिवाइस थी। यह एक ऐसी डिवाइस थी जो कपड़ों का डिजाइन खुद तैयार कर लेती थी। यह डिवाइस कार्डबोर्ड के पंच कार्ड द्वारा नियंत्रित की जाती थी। कंप्यूटर के विकास में इस डिवाइस में अपना योगदान महत्वपूर्ण रूप से दिया है इस डिवाइस द्वारा दो विचारधाराएं निकल के सामने आती थी पहली यह कि पंच कार्ड पर सूचनाओं को अंकित किया जा सकता था और दूसरा पंच कार्ड पर पहले से सूचित सूचना को निर्देश माना जा सकता था।

Difference Engine :-

पास्कलाइन डिवाइस से प्रेरणा लेकर डिफरेंस इंजन का निर्माण किया गया ताकि एक निश्चित और विश्वसनीय परिणाम मिल सके। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में चार्ल्स बैबेज ने डिफरेंस इंजन (Difference Engine) का निर्माण किया। चार्ल्स बेबस कैंब्रिज कॉलेज के प्रोफेसर रहे हैं।

निष्कर्ष :-

इस आर्टिकल में हमने आपको कम्प्यूटर के इतिहास (Computer History in Hindi)  की जानकारी दी है।

ऐसे ही जानकारी से भरपूर लेख पढ़ने के लिए हमारे वेब पोर्टल को फॉलो करें।

Leave a Comment

Your email address will not be published.