Kedarnath Temple History in Hindi | केदारनाथ मंदिर का इतिहास

आज का हमारा आर्टिकल Kedarnath Temple History in Hindi से संबंधित है।‌

केदारनाथ मंदिर एक बहुत ही पुराना ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर है। केदारनाथ मंदिर भारत में धार्मिक और तीर्थ स्थलों में से एक है। केदारनाथ मंदिर से जुड़ी हर कथा एवं आस्था धार्मिक पुरोहित एवं स्थानीय यजमानों द्वारा पर्यटक को तथा स्थानीय लोगों को बताई जाती है। केदारनाथ मंदिर देखने में बहुत भाग्यशाली है और केदारनाथ धाम में पैर रखते ही मन को एक शांति और सुकून प्राप्त होता है। केदारनाथ धाम में दर्शन करने वाले यात्रियों को स्वयं भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

केदारनाथ मंदिर को लेकर सभी की कामना रहती है कि वह जीवन में एक बार केदारनाथ धाम के दर्शन जरूर करे। क्या आप जानते हैं कि केदारनाथ मंदिर का इतिहास क्या है (Kedarnath Temple History in Hindi) अगर नहीं तो आप हमारे लेख के माध्यम से केदारनाथ मंदिर का इतिहास और केदारनाथ मंदिर से जुड़ी हर जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

Read Also – भारत के त्योहारों की लिस्ट

Kedarnath Temple History in Hindi

केदारनाथ मंदिर कहां है और केदारनाथ मंदिर का निर्माण किसने और कब करवाया था?

केदारनाथ मंदिर हिंदू धर्म में प्रचलित है तथा यह मंदिर भारत के राज्य उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है।  केदारनाथ मंदिर हिमालय पर्वत की गोद में स्थित 12 ज्योतिर्लिंग में शामिल है। इस मंदिर का निर्माण कत्यूरी शैली से किया गया है और इसके निर्माता पांडव वंश जनमेजय है। केदारनाथ मंदिर का निर्माण द्वापर युग में हुआ था। केदारनाथ मंदिर में स्थित स्वयंभू शिवलिंग बहुत ही पुराना एवं लोकप्रिय है।

केदारनाथ मंदिर का इतिहास

केदारनाथ मंदिर की महिमा अपरंपार है। उत्तराखंड में स्थित बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम भारत के दो महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति केदारनाथ धाम से पहले बद्रीनाथ धाम की यात्रा करता है तो उसकी यात्रा और सफल मानी जाती है और जो व्यक्ति केदारनाथ धाम की यात्रा पहले करता है उसे नर नारायण मूर्ति के दर्शन होते हैं और उसके जीवन की सारी चिंताएं और पाप खत्म हो जाते हैं।

केदारनाथ मंदिर के इतिहास की बात की जाए तो यह बहुत प्राचीन है और लगभग 12 से 13वीं शताब्दी का बना हुआ है। स्थानीय पुरोहितों और विद्वानों के अनुसार

केदारनाथ मंदिर का निर्माण 80वीं शताब्दी में द्वापर युग के काल में हुआ था। यह मंदिर हिमालय के लगभग 6 फुट ऊंचे स्थान पर बनाया गया है। इस मंदिर के चारों ओर बर्फ के पहाड़ हैं। केदारनाथ मंदिर मुख्य रूप से पांच नदियों के संगम का मुख्य धाम माना जाता है और यह नदियां मंदाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी है। आदि गुरु शंकराचार्य के समय काल से यहां के पुरोहित और ब्राह्मण स्वयंभू शिवलिंग की पूजा और आराधना करते आ रहे हैं।

केदारनाथ मंदिर का वास्तुशिल्प | Kedarnath Temple architecture

केदारनाथ मंदिर 6 फुट ऊंचे चौकोर चबूतरे के ऊपर बना हुआ है। मंदिर के मुख्य भाग में मंडप तथा गर्भ ग्रह के चारों और प्रदक्षिणा पथ बना हुआ है। मंदिर के बाहरी हिस्से में नंदी बैल वाहन के रूप में विराजित हैं। मंदिर के मध्य भाग में श्री केदारेश्वर स्वयंभू ज्योतिर्लिंग स्थित है जिसके अग्र भाग पर भगवान गणेश जी की प्रतिमा और मां पार्वती के यंत्र का चित्र है। ज्योतिर्लिंग के ऊपरी भाग पर प्राकृतिक स्फटिक माला विराजित है।

श्री ज्योतिर्लिंग के चारों और बड़े-बड़े चार स्तंभ विद्यमान हैं और यह चार स्तंभ चारों वेदों के आधार माने जाते हैं। इन विशालकाय चार स्तंभों पर मंदिर की छत टिकी हुई है। ज्योतिर्लिंग के पश्चिमी भाग में एक अखंड दीपक विद्यमान है और हजार सालों से इसकी ज्योति का प्रकाश मंदिर की आस्था को बनाए हुए हैं। इस अखंड दीपक की ज्योति का रखरखाव मंदिर के पुरोहित सालों से करते आ रहे हैं ताकि यह अखंड दीपक की ज्योति सदैव मंदिर के भाग में और पूरे केदारनाथ धाम में अपने प्रकाश को बनाए रखें। मंदिर की दीवारों पर सुंदर एवं भव्य फूलों की बनावट को हस्तकला द्वारा चित्रित किया गया है।

रोजाना मंदिर के ज्योतिर्लिंग को प्राकृतिक रूप से स्नान कराया जाता है तथा उसके पश्चात घी का लेपन किया जाता है‌ एवं धूप अगरबत्ती और दीपक जलाकर आरती को आरंभ किया जाता है। संध्या काल के वक्त भगवान का श्रृंगार किया जाता है। भगवान तथा ज्योतिर्लिंग की पूजा के दौरान भक्त लोग केवल दूर से ही आरती का लाभ उठा सकते हैं।

केदारनाथ मंदिर में दर्शन का समय क्या है?

यदि आप केदारनाथ की यात्रा पर गए हैं तो आपको केदारनाथ मंदिर के दर्शन के समय का ज्ञान होना चाहिए। केदारनाथ मंदिर के दर्शन की समय प्रक्रिया इस प्रकार है-:

  • केदारनाथ मंदिर के द्वार आम भक्तों के दर्शन के लिए सुबह 6:00 बजे खुलते हैं।
  •  मंदिर में दोपहर 3 से लेकर 5 बजे के बीच एक खास पूजा होती है तथा इसके बाद भगवान के विश्राम के लिए मंदिर के कपाट को बंद कर दिया जाता है।
  • मंदिर के द्वार को पुनः सायं 5:00 बजे खुल जाते हैं जिसके फलस्वरूप आम जनता मंदिर में दर्शन कर सकती हैं। ‌
  • सायंकाल में मंदिर में स्थित पांच मुख वाले भगवान शिव की प्रतिमा का साज सिंगार किया जाता है और संध्या काल की आरती का समय जो कि 7:30 से लेकर 8:30 बजे के बीच तय है जिसमें भगवान शिव की आरती की जाती है।
  • आरती के पश्चात 8:30 बजे मंदिर के कपाट को बंद कर दिया जाता है।
  • शीतकाल में केदारनाथ घाटी बर्फ से लग जाती है इसीलिए पुरोहितों द्वारा नवंबर 15 से लेकर शीतकाल के अंत यानी 14 या 15 अप्रैल तक केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
  • शीतकाल के दौरान भगवान शंकर की पांच मुख वाली प्रतिमा को उखीमठ में स्थापित किया जाता है।
  • केदारनाथ मंदिर के दर्शन के लिए जनता शुल्क अदा करती है तथा इस रसीद के फलस्वरूप वह मंदिर में पूजा-अर्चना और भोग को चढ़ाती है।‌

भगवान शंकर की पूजा में मुख्य रूप से प्रातः कालिक पूजा, महाभिषेक पूजा, अभिषेक, रुद्राभिषेक षोडशोपचार पूजन, अष्टोंपाचार पूजन‌, संपूर्ण आरती, पांडव पूजा, गणेश पूजा, श्री भैरव पूजा, शिव, विष्णु सहस्त्रनाम आदि शामिल हैं। 

निष्कर्ष :-

इस आर्टिकल में हमने आपको केदारनाथ मंदिर का इतिहास और केदारनाथ मंदिर से जुड़ी मुख्य बातों के बारे में जानकारी दी है।

ऐसे ही तीर्थ स्थलों से संबंधित लेख पढ़ने के लिए हमारे वेबसाइट को फॉलो करें।

Leave a Comment

Your email address will not be published.