Somnath Temple History in Hindi | सोमनाथ मंदिर का इतिहास

आज का हमारा आर्टिकल सोमनाथ मंदिर का इतिहास (Somnath Temple History in Hindi) से संबंधित है।

भारतीय संस्कृति तथा हिंदू धर्म में मंदिर का प्राचीन समय से ही एक बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। मंदिर वह जगह है जहां ईश्वर एवं भगवान बसते हैं। मंदिर ही एक ऐसा स्थान है जहां पर ईश्वर का वास होता है। कहा जाता है कि जिस मंदिर में जिस भी देवता की मूर्ति स्थापित होती है वह स्वयं वहीं पर वास करते हैं और स्थानीय भक्तों पर अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं।

यूं तो कहते हैं कि भगवान को किसने नहीं देखा है परंतु धरती पर भगवान से प्रार्थना करने, भगवान की भक्ति करने तथा भगवान से प्रत्यक्ष रूप से बात करने के लिए मंदिर ही एक स्थान है जहां हर सुख दुख की परिस्थिति में व्यक्ति भगवान का आशीर्वाद लेकर स्वयं का जीवन सरल एवं सुखी बना सकता है।

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Somnath Temple History in Hindi :-

भारत में यूं तो कई प्राचीन मंदिर है परंतु सोमनाथ मंदिर सभी प्राचीन मंदिरों में से एक है और महत्वपूर्ण भी क्योंकि सोमनाथ मंदिर का इतिहास (Somnath Temple History in Hindi) अन्य मंदिरों के इतिहास से भिन्न है। क्या आपको पता है सोमनाथ मंदिर कहां है और सोमनाथ मंदिर का इतिहास क्या है अगर नहीं तो आज के हमारे इस लेख में आपको सोमनाथ मंदिर के इतिहास तथा सोमनाथ मंदिर से संबंधित सभी जानकारी जानने को मिलेगी।

सोमनाथ मंदिर हिंदू धर्म के उत्थान और पतन से महत्वपूर्ण से संबंध रखता है। सोमनाथ मंदिर भारत के गुजरात राज्य में स्थित है। यह गुजरात के बंदरगाह वेरावल में स्थित है। हिंदू धर्म पुराणों के अनुसार चंद्रदेव ने स्वयं सोमनाथ मंदिर का निर्माण किया था और इस का वर्णन ऋग्वेद में स्पष्ट रूप से मिलता है। इस मंदिर को भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। इतिहास में इस मंदिर को कई बार तोड़ा और इसे पुनः निर्मित किया गया है।

भारत को आजादी मिलने के बाद दिग्गज राजनेता एवं लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इस मंदिर का पुन: निर्माण करवाया था। साल 1955 को डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ मंदिर को संपूर्ण राष्ट्र को समर्पित कर दिया। सोमनाथ मंदिर ना केवल भारत में बल्कि यह पूरे विश्व में प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल है। सोमनाथ मंदिर में शाम के 7:30 से 8:30 के मध्य एक लाइट शो का आयोजन किया जाता है जिसमें सोमनाथ मंदिर के इतिहास का सुंदर चित्रण प्रस्तुति दिखाई जाती है।

धार्मिक लोक कथाओं के अनुसार सोमनाथ मंदिर की पावन धरती पर ही भगवान श्री कृष्ण ने अपना देह त्याग किया था इसीलिए इस मंदिर की महत्ता और बढ़ जाती है। सोमनाथ मंदिर से संबंधित सभी कार्य तथा व्यवस्था का संचालन सोमनाथ ट्रस्ट के तहत संपन्न किया जाता है। भारत सरकार ने सोमनाथ ट्रस्ट को बाग बगीचे और जमीन देकर सोमनाथ मंदिर के चारों ओर आय का साधन स्थापित किया है।

हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण क्रम श्राद्ध की विधि के लिए यह स्थान को विशेष महत्व दिया गया है और चैत्र, भाद्रपद और कार्तिक मास में इस स्थान पर श्राद्ध की प्रक्रिया को पूर्ण करना बेहद पुण्य का कर्म बताया गया है। इन तीन महीनों की विशेषताओं को देखते हुए ही इन तीनों महीनों में सोमनाथ मंदिर स्थल पर काफी भक्तों की भीड़ जमा हो जाती है क्योंकि श्राद्ध विधि को पूरा करना हिंदू धर्म का परम कर्तव्य है।

सोमनाथ मंदिर तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती का संगम भी माना जाता है इस संगम की वजह से ही इस क्षेत्र की पवित्रता और भी अधिक हो जाती है। पुरोहितों तथा धार्मिक गुरुओं द्वारा इस त्रिवेणी संगम में स्नान करने की सलाह दी जाती है ताकि शरीर के सब रोग मिट जाए और जीवन में शांति एवं समृद्धि आए।

सोमनाथ मंदिर के दर्शन करने तथा भव्य पर्यटन स्थल को देखने के लिए विदेशों से भी लोग आते हैं और यहां की भक्ति में रंग जाते हैं। सोमनाथ मंदिर एक भव्य और विशाल मंदिर है एवं इसके चारों और अन्य कई मंदिर भी बने हुए हैं। मंदिर के आसपास की हरिभूमि और बाग बगीचे मंदिर स्थल की सुंदरता को बढ़ाते है।‌

सोमनाथ मंदिर का इतिहास

सोमनाथ मंदिर के इतिहास की बात की जाए तो ईसा पूर्व काल में सबसे पहले इस मंदिर का एक अस्तित्व पाया गया था जिसे उस समय के वल्लभी मैत्रिक राजा ने पुनर्निर्माण के लिए आदेश दे दिया था। परंतु सिंध के अरबी राजा जुनायद ने इसे तोड़ने की रणनीति बनाई और अपनी सेना को स्थल पर भेज दिया। इसके बाद 815 इसी में राजा नागभट्ट ने सोमनाथ मंदिर का तीसरी बार पुनः निर्माण करवाया। इस मंदिर की महिमा बहुत थी और इसकी चर्चा दूर दूर तक फैली हुई थी। अरब यात्री अलबरूनी ने अपने यात्रा वृतांत में सोमनाथ मंदिर की चर्चा की है।

अलबरूनी की यात्रा वृतांत से महमूद गजनवी प्रभावित हुआ और उसने 1024 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हमला करने की रणनीति बनाई। महमूद गजनवी सोमनाथ मंदिर के स्थल पर अपनी सेना के साथ पहुंचा उसने सोमनाथ मंदिर की संपत्ति लूटी और भवन को नष्ट कर दिया। महमूद गजनवी के हमले के दौरान मंदिर के अंदर 50,0000 भक्त पूजा अर्चना कर रहे थे और महमूद के हमले से वह सभी मारे गए।

सोमनाथ मंदिर का पांचवीं बार पुनः निर्माण राजा भीम और भोज ने कराया। साल 1297 में जब दिल्ली सल्तनत के मुगलों ने गुजरात पर हमला किया तो यह मंदिर फिर से गिराया गया। इस समय इस मंदिर को मुगल सल्तनत के राजा औरंगजेब ने गिरवा दिया था।

वर्तमान में सोमनाथ मंदिर के रूप में जो भवन खड़ा है वह आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के आदेश अनुसार पुन: निर्मित किया गया है और अब तक अस्तित्व में है। अब यह मंदिर भारत का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थल बन गया है। यह भारत की प्राचीन धरोहर है जिसे सहेज कर रखना हर भारतवासी का कर्तव्य है।

निष्कर्ष :-

इस आर्टिकल में हमने आपको सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple History in Hindi) के इतिहास तथा सोमनाथ मंदिर से संबंधित जानकारी प्रदान की है।

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