Akbar History in Hindi | अकबर की जीवनी

आज का हमारा आर्टिकल अकबर का इतिहास (  Akbar History in Hindi) से संबंधित है।‌मुगल शासकों से संबंध रखने वाला एक तथ्य यह है कि जिन भी मुगल राजाओं ने भारत पर राज किया वह भारत से तालुकात नहीं रखते थे वह कहीं अन्य प्रदेश से ही आए हुए थे। मुगल साम्राज्य के कई शासकों ने भारत में अपना साम्राज्य स्थापित करने तथा उसका विस्तार करने के लिए कड़ी कोशिशें की और कई शासकों ने काफी हद तक मुगल साम्राज्य का विस्तार भारत में किया और काफी समय तक भारत पर शासन भी किया। 

ऐसे ही महान शासकों में से एक अकबर भी था जिसने भारत पर काफी लंबे समय तक शासन किया और मुगल साम्राज्य का विस्तार करने में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया परंतु क्या आप जानते हैं कि अकबर का इतिहास क्या है(Akbar History in Hindi) और उसे शासनकाल क्या रहा है अगर नहीं तो हमारे इस लेख के माध्यम से आपको अकबर से संबंधित सभी जानकारी मिल जाएगी। 

Akbar History in Hindi | अकबर का इतिहास 

अकबर का पूरा नाम जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर था और वह महान मुगल शासक हुमायूं के पुत्र थे। अकबर का जन्म 15 अक्टूबर सन् 1542 को अमरकोट के राजपूत किले में हुआ था। अकबर को उसकी प्रजा ने अकबर ए आज़म, शहंशाह, ‌ महाबली शहंशाह आदि नाम दिए थे। जिस वक्त में अकबर का जन्म हुआ था तो उसके पिता हुमायूं को देश से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद हुमायूं अफगानिस्तान में आ गए और यहां पर अकबर का पालन पोषण अकबर के चाचा अस्कारी और उनकी पत्नी ने किया।

अकबर को अपने पिता से युद्ध की रणनीति और शस्त्र विद्या का ज्ञान मिला था इसलिए उसने युवावस्था से ही शिकार करना और युद्ध में भाग लेना आदि की शुरुआत कर दी थी। ‌ अकबर को एक साथ कई शिक्षाओं की प्राप्ति थी और वह हर क्षेत्र में माहिर होने के साथ-साथ एक बेहतरीन मुगल शासक थे। 14 फरवरी 1556 में हुमायूं का निधन हो गया और तब से अकबर ने राज सिंहासन पर अपना अधिकार प्राप्त किया। जब अकबर ने राज सिंहासन संभाला तो वह 13 वर्ष की आयु के थे। अकबर कम आयु के थे इसलिए उनका मार्गदर्शन करने के लिए हुमायूं के खास मंत्री बैरम खान कार्यरत रहे। 

सिंहासन संभालने के पश्चात अकबर ने पंजाब के सिकंदर शाह सूरी के शासन को खत्म करने की रणनीति बनाई और तारडी बेग खां के अधीन दिल्ली के साम्राज्य को सौंप कर पंजाब की ओर निकल पड़े। अकबर ने अपनी सेना के साथ सिकंदर शाह सूरी पर हमला किया और विजय प्राप्त की इस बीच अकबर के दिल्ली में गैरमौजूदगी में एक हिंदू शासक हेमू ने दिल्ली में अपना स्थान ग्रहण कर लिया। हेमू के आक्रमण को देखते हुए तारडी बेग खां ने दिल्ली को छोड़ने का फैसला किया।

यह भी पढ़ें- Maharana Pratap History 

अकबर ने हेमू को मुलाकात के लिए संदेश भेजा और युद्ध के लिए प्रस्ताव जारी किया जिसके फलस्वरूप पानीपत के दूसरे युद्ध में अकबर ने हेमू से युद्ध किया और विजय प्राप्त की एवं पुनः दिल्ली पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। अकबर एक कुशल और चतुर शासक था एवं उसकी कोशिश हमेशा संपूर्ण भारत पर अपना नियंत्रण स्थापित करने तथा मुगल साम्राज्य का विस्तार करने की रहती थी। 

यदि अकबर के इतिहास की (akbar history in Hindi) बात की जाए तो मुगल साम्राज्य में केवल अकबर ही एक ऐसा शासक था जिसे हिंदू एवं मुसलमान दोनों ही प्रजा के लोगों से  बराबर का सहयोग एवं स्नेह प्राप्त हुआ। ‌हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच भाईचारा एवं स्नेह स्थापित करने तथा दूरियों को खत्म करने के लिए उसने दीन ए इलाही नामक धर्म को स्थापित किया। चूंकि अकबर को हिंदुओं का भी परस्पर सहयोग एवं सम्मान मिला था इसीलिए उस के दरबार में मुस्लिम सैनिकों की अपेक्षा हिंदू सरदार सैनिक अधिक रूप में मौजूद थे।

अकबर ने अपने शासनकाल में हिंदुओं पर लगने वाले जजिया कर को समाप्त कर दिया था जिससे हिंदू प्रजा में अकबर के लिए प्यार एवं सम्मान की भावना बढ़ गई थी। अकबर ने उत्तर और मध्य भारत के सभी क्षेत्रों पर अपना वर्चस्व कायम किया और भारतीय महाद्वीप के बड़े क्षेत्र में मुगल साम्राज्य को स्थापित करने तथा नियंत्रण में लाने के लिए अकबर को दो दशक लग गए अकबर ऐसा पहला मुगल शासक था जिसने भारत के बड़े जिससे पर अपना अधिकार प्राप्त किया था और लंबे समय तक शासन किया।

अकबर ने महान एवं शक्तिशाली राजपूत हिंदुओं राजाओं से राजनीतिक संबंध स्थापित किए और उनके राज्य में हिंदू महिलाओं से विवाह भी किया। उसने कभी भी अपनी हिंदू पत्नियों को धर्म परिवर्तन के लिए बाधित नहीं किया बल्कि अपने धर्म में रहकर ही जीवन यापन करने का संदेश दिया।

अकबर ने अपने शासनकाल में कला एवं संस्कृति में भी भरपूर रूप से रुचि दिखाई और सुंदर चित्रों एवं नमूनों से मुगल कला का एक प्रारूप दुनिया के सामने पेश किया। अकबर को साहित्य से भी काफी लगाव था और उसने कई फारसी ग्रंथों को संस्कृत एवं हिंदी में तथा हिंदी एवं संस्कृत ग्रंथों को फारसी में तब्दील करवाया। अकबर ने अपने दरबार की दीवारों पर फारसी संस्कृति का चित्र भी उकेरवाया था। 

अकबर के दरबार में कई हिंदू दरबारी, सैनिक और सामंत शामिल थे। ‌ अकबर के दरबार में होने वाली धार्मिक चर्चाओं एवं वाद विवाद कार्यक्रमों में अनेक धर्मों जैसे सिख, हिंदू, चार्वाक, जैन, ईसाई, नास्तिक, यहूदी, पुर्तगाली आदि धर्म विशेषज्ञ भाग लेते थे इन धार्मिक लोगों के प्रति अकबर सम्मान की भावना एवं सहयोग का प्रदर्शन करता था। अकबर के द्वारा स्थापित किए गए दीन ए इलाही धर्म में सभी धर्मों की नीतियां एवं शिक्षाएं शामिल थे। अकबर के शासन काल में अबुल फजल ने मुगल साम्राज्य के महत्वपूर्ण तथ्य तथा अकबर की जीवन गाथा को दर्शाने के लिए अकबरनामा पुस्तक का निर्माण किया था तथा अन्य लेखक बदायूनी द्वारा शहजादा रशीदी नामक पुस्तक भी लिखी गई थी। 

अकबर एक महान शासक था और उसने संपूर्ण भारत पर काफी लंबे समय के लिए मुगल साम्राज्य को स्थापित किया था। 27 अक्टूबर 1650 को अकबर की मृत्यु हो गई और उसके शव को आगरा के सिकंदरा जिले में दीवार तोड़कर दफनाया गया। अब आगरा में वह स्थान एक मकबरे के रूप में बनकर सदियों से तैयार है। 

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने आपको अकबर का इतिहास (Akbar History in Hindi) से संबंधित जानकारी प्रदान की है। 

Leave a Comment

Your email address will not be published.