Hindi bhasha ki lipi kya hai ?

Hindi bhasha ki lipi kya hai

Hindi bhasha ki lipi kya hai-हिंदी भाषा भारत मे सदियों से बोली जा रही है। संस्कृति भाषा के बाद हिंदी एक मात्र ऐसी भाषा है जो भारत की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। लेकिन अगर आपकों यह ज्ञात नहीं है कि हिंदी भाषा की लिपि क्या है तो हिन्दी भाषा की लिपि देवनागरी लिपि है।  देवनागरी एक भारतीय लिपि है जिसमें अनेक भारतीय भाषाएँ तथा विदेशी भाषाएँ शामिल हैं। खास बात यह है कि यह भाषा बायें से दायें लिखी जाती है। इसकी पहचान एक क्षैतिज रेखा से है जिसे ‘शिरोरेखा’ कहते हैं। देवनागरी विश्व में सर्वाधिक प्रयुक्त लिपियों में से एक है।

देवनागरी का विकास ब्राह्मी लिपि से हुआ है। यह एक ध्वन्यात्मक लिपि है जो प्रचलित लिपियों (रोमन, अरबी, चीनी आदि) में सबसे अधिक वैज्ञानिक मानी जाती है। इसके अलावा इसमें वैज्ञानिक और व्यापक लिपि शायद केवल अध्वव लिपि है।

Hindi bhasha ki lipi kya hai-देवनागरी में लिखी जाने वाली बोलियां

देवनागरी में बहुत सी भाषाओं को लिखा जाता है। संस्कृत, पालि, हिन्दी, मराठी, कोंकणी, सिन्धी, कश्मीरी, हरियाणवी, बुंदेली भाषा, डोगरी, खस, नेपाल भाषा (तथा अन्य नेपाली भाषाएँ), तमांग भाषा, गढ़वाली, बोडो, अंगिका, मगही, भोजपुरी, नागपुरी, मैथिली, संताली, राजस्थानी भाषा, बघेली आदि भाषाएँ और स्थानीय बोलियाँ भी देवनागरी में लिखी जाती हैं।

इसके अतिरिक्त  गुजराती, पंजाबी, बिष्णुपुरिया मणिपुरी, रोमानी और उर्दू भाषाएँ भी देवनागरी में लिखी जाती हैं। वैसे तो भारतीय भाषाओं के किसी भी शब्द या ध्वनि को देवनागरी लिपि में ज्यों का त्यों लिखा जा सकता है। देवनागरी लिपि में कुल 52 अक्षर हैं, जिसमें १४ स्वर और ३८ व्यंजन हैं।

हिंदी भाषा की लिपि का प्रयोग करने वाली भाषाएँ:-

हिंदी भाषा की लिपि का प्रयोग करने वाली भाषाओं को निम्न प्रकार से बता रहे है। अवधी, कन्नौज, कश्मीर, कांगडी, किन्नौरी,कुड़माली, कुमाउँनी, कोंकणी, कोया,खानदेशी, ख़ालिड, खड़िया,गढ़वाली, गुर्जरी,गुरुड़, गोंडी, चम्बयाली, चामलीड, चुराही आदि। इसके साथ-साथ cheap language , छत्तीसगड़ी, छिन्ताङ, जिरेल,जुम्ली,तिलुङ,वारली,वासवी,वागडी,वाम्बुले,हिन्दी, मराठी भी देवनागरी लिपि में प्रयोग की जाती है।

देवनागरी शब्द की व्युत्पत्ति:-

देवनागरी शब्द की उत्पत्ति के बारे में पूर्ण रूप से मत किसी का भी नहीं है कहीं-कहीं नागर अपभ्रंश या गुजराती नागर ब्राह्मणों के अनुसार इसकी उत्पत्ति का वर्णन किया गया है दक्षिण भारत में भी देवनागरी लिपि का उपयोग के संकेतिक चिन्ह और देवताओं की उपासना में चक्र आदि का उपयोग किया गया है क्योंकि देवताओं की उपासना ओं में उपयोग किए जाने वाले संकेतिक चिन्ह को देवनगर कहा जाता रहा जिस कारण से इस लिपि को देवनागरी लिपि का नाम दिया गया। किंतु इसके निश्चित प्रमाण नहीं है।

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