धनतेरस कब है 2021-जानिए तिथि, पूजन का शुभ मुहूर्त और महत्व

धनतेरस कब है -जानिए तिथि,

कार्तिक मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को इस दिन भगवान सूर्य ने कलि के द्वारा निर्मित रोगों से पीड़ित संसार के प्राणियों को रोगों से मुक्त कराया एवं देवताओं का कार्य सिद्ध करने के लिए कलयुग में काशी नगरी में कल्पंदत नामक ब्राह्मण के पुत्र रूप में जन्म लिया और वह आगे चलकर धनवंतरी के नाम से प्रसिद्ध हुए जिन्होंने राजपुत्र सुश्रुत को अपना शिष्य बनाया एवं चिकित्सा शास्त्र आयुर्वेद की रचना की।

धनतेरस कब है (धन त्रयोदशी)और धन्वन्तरि जंयती

इस दिन नए गणेश लक्ष्मी, नए बर्तन मिठाई एवं खेल खिलौने बाजार से खरीदने की परंपरा  है क्योंकि इस दिन वेदराज धनवंतरि और यमराज के निर्मित घर के मुख्य द्वार पर दीप प्रज्वलित कर आरोग्य एवं दीर्घायु की कामना करनी चाहिए ,ऐसा करने से किसी भी प्रकार के रोग एवं अकाल मृत्यु का भय नहीं होता है ।

स्वास्थ्य धन

 धनतेरस

हमारा स्वास्थ्य धन सबसे महत्वपूर्ण है इसके लिए आवंला  और हल्दी दोनों को हमें खरीद कर उसका पूजन करके, सालभर अपने घर में आरोग्य हेतु सेवन करना चाहिए।

कोई भी नई अयुर्वेद दवा या नया उपचार, रोगी को स्नान और नेगेटिविटी समाप्त करने के लिए हमें कनकधारा पूजा जरूर करना चाहिए।

सायं काल दरवाजे पर अनाजों के ऊपर  उस पर चार बत्ती का दीपक लगाना चाहिए।जो रात्रि मे जलाया जाय अलसी का तेल हो। 

दीपदान हेतु चार बत्ती का दीपक आटे का बना कर किसी भी जल स्थान में दीप दान करना चाहिए हर व्यक्ति के लिए अलग दीपक होना चाहिए।

 धन्वंतरी जयंती के एक कलश की स्थापना करके साल भर में अनाज भरकर  एक नारियल रखना चाहिए ।

 2 अक्टूबर 2021 मंगलवार

धन तेरस  कार्तिक कृष्ण पक्ष

 अंक ज्योतिष से 2+2+5=9

इस वर्ष…

 मंगल से संबंधित वस्तुएं का ही मार्केट में असर ज्यादा होगा.. शेयर मार्केट भी उछाल पर होगा चिकित्सा, सोना पारा सर्जरी के उपकरण,शस्त्र निर्माण का व्यवसाय, भूमि का व्यवसाय सुनार,लोहार,रासायनिक, भट्टी वा बिजली के उपकरण,बेकरी, रसोई से संबंधित,लाटरी रस का व्यापार, युद्ध से संबंधित वेपंस…

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 धनतेरस का गोचर

 चंद्रमा हस्त नक्षत्र में  कन्या राशि में तुला राशि में सूर्य मंगल बुध होंगे गुरु और शनि मकर राशि में, शुक्र धनु राशि में

 गोचर के हिसाब से राहु का प्रभाव होने से कंप्यूटर,लैपटॉप, मोबाइल, गजर्ट  की बिक्री ज्यादा होगी…

धनतेरस पूजा मुहूर्त

1. प्रदोष काल:-

सूर्यास्त के बाद के 2 घण्टे 24 की अवधि को प्रदोषकाल के नाम से जाना जाता है. साथ ही स्थिर लग्न वृषभ लग्न 6:20 से 8:10 शाम को रहेगी…

 2.मूहूर्त  चौघड़िया धनतेरस का

लाभ काल मुहूर्त 10:30 से 12 सुबह  तक और रात्रि 7:30 से 9:00 तक..

लाभ  (बुध का चौघड़िया) क्या खरीदें???

इसमें बहीखाते , भूमि- भवन, सोना चांदी नाग सिक्के बर्तन कमर्शियल वाहन आदि का खरीदने का व्यापार शुरू करने का श्रेष्ठ मुहूर्त है ।

 चर चौघड़िए में 9से 10.30 सुबह ..

वाहन ,मशीनरी के समान की खरीदारी करें।

 शुभ  काल मुहूर्त 3:00 से 4:30 तक शाम और रात्रि में 10:30 से 12:00 तक..

शुभ के चौघड़िए में

 (गुरू का चौघड़िया)है।

इसमें स्वास्थ्य संबंधित आयुर्वेदिक, दवाइयां ,हल्दी, आंवला, पेड़ पौधे, सोना,चांदी, धातुएं, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, बर्तन, नग ,कुबेर की मूर्तियां,वस्त्र, कुबेर यंत्र, श्री यंत्र, धन वृद्धि यंत्र मंगल यंत्र, कलम,खेती का समान

किताब ,कलश, तराजू की खरीदारी करें ।

अमृत काल मुहूर्त 12से 1:30 दोपहर और रात्रि 12:00 से 1:30 तक

अमृत के (चंद्रमा का चौघड़िया) सभी कार्य सिद्ध होते हैं !

इसके चांदी गणेश लक्ष्मी, सजावटी समान, सिंगार का सामान, वस्त्र व अन्य खाद्य पदार्थ खरीदने का श्रेष्ठ मुहूर्त है!

 ध्यान दें खरीदने से पहले

 अगर आप उधार लेकर धनतेरस की खरीदारी करेंगे तो आपका यह ऋण बढ़ जाएगा क्योंकि इस दिन मंगलवार और हस्त नक्षत्र होने पर वृद्धि योग बनता है ऋण से… जिसे आप चुका नहीं पाएंगे बढ़ता जाएगा।

धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए

लक्ष्मी जी व गणेश जी की चांदी की प्रतिमाओं को इस दिन घर लाना, घर- कार्यालय,. व्यापारिक संस्थाओं में धन, सफलता व उन्नति को बढाता है.

धनवन्तरी समुद्र से कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिये इस दिन खास तौर से बर्तनों की खरीदारी की जाती है. इस दिन बर्तन, चांदी खरीदने से इनमें 13 गुणा वृ्द्धि होने की संभावना होती है.

सूखे धनिया के बीज खरीद कर घर में रखना भी परिवार की धन संपदा में वृ्द्धि करता है. कारण बुध से व्यापार से जोड़ा जाता है.. दीपावली के दिन इन बीजों को बाग/ खेतों में लागाया जाता है ये बीज व्यक्ति की उन्नति व धन वृ्द्धि के प्रतीक होते है.

धन तेरस की पूजा शुभ मुहुर्त में करनी चाहिए. सबसे पहले तेरह दीपक जला कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करना चाहिए. देव कुबेर का ध्यान  करना चाहिए इन की मूर्ति या इनकी फोटो भी घर में लाना चाहिए

‘यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये

धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा ।’

पूजन मैं क्या करें?

उत्तरी भारत में धनतेरस का पर्व धन्वंतरि, लक्ष्मी जी धन के देवता कुबेर के पूजन की परम्परा है.

इस दिन यमदेव की पूजा करने से घर में असमय मृ्त्यु का भय नहीं रहता है. धन त्रयोदशी के दिन यमदेव की पूजा करने के बाद घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख वाला दीपक पूरी रात्रि जलाना चाहिए. इस दीपक में कुछ पैसा व कौडी भी डाली जाती है. बाद में यह पैसा वा कोड़ी अपने पास रखा जाता है..

साथ ही इस दिन नये उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ रहता है. शुभ मुहूर्त समय में पूजन करना चाहिए..

सात धान्यों की पूजा की जाती है. सात धान्य गेंहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर है. सात धान्यllll अन्ना पूर्णा  का भंडार साल भर घर में रहता है…

पूजन सामग्री में विशेष रुप से स्वर्णपुष्पा के पुष्प से भगवती का पूजन करना लाभकारी रहता है. यह सोने को वृद्धि करने वाला होता है..

 (अंजना ज्योतिष)

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